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धूम्रपान पर प्रतिबंध हिंदी निबंध

👀 इस पेज पर नीचे लिखा हुआ धूम्रपान पर प्रतिबंध हिंदी निबंध / धूम्रपान निषेध पर निबंध  ( Hindi Essay on Smoking ban) आप को अपने स्कूल या फिर कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए निबंध लिखने में सहायता कर सकता है। आपको हमारे इस वेबसाइट पर और भी कही विषयों पर हिंदी में निबंध मिलेंगे (👉 निबंध सूचकांक), जिन्हे आप पढ़ सकते है, तथा आप उन सब विषयों पर अपना निबंध लिख कर साझा कर सकते हैं


धूम्रपान पर प्रतिबंध हिंदी निबंध
धूम्रपान निषेध पर निबंध
Hindi Essay on Smoking ban


🗣️ धूम्रपान पर प्रतिबंध हिंदी निबंध / धूम्रपान निषेध पर निबंध  ( Hindi Essay on Smoking ban) पर यह निबंध बच्चो (kids) और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12, कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए और अन्य विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए लिखा गया है।

प्रस्तावना

जीवन में हम सभी मनोरंजन के लिये बहुत सारी चीजों में लगे रहते हैं। अपने परिवार के साथ समय बिताना, दोस्तों के साथ गप्पे लड़ाना, ज्ञानवर्धन के लिये पुस्तकें पढ़ना और अन्य कई सारे सार्थक कामों से समय का उपयोग करते हैं। परन्तु दुनिया में हम सभी के बीच ही एक वर्ग ऐसा रहता है जो अपना समय धूम्रपान और नशे जैसी व्यसनों में बिताता है। यह कितने दुख की बात है कि मनोरंजन के इतने उपायों के बावजूद लोग नशे की ओर उन्मुख होकर अपना जीवन दाँव पर लगा देते हैं। धूम्रपान आदि पर प्रतिबंध के लिये कई संस्थाएं जागरुकता अभियान चलाती हैं और धूम्रपान व नशों का कड़ा विरोध करती हैं। आखिर धूम्रपान जैसे नशों पर प्रतिबंध क्यों जरूरी है, आइये इसे थोड़ा समझें।

धूम्रपान से होने वाली हानियाँ

धूम्रपान करने वाले लोग स्वयं को नुकसान पहुँचाने के साथ-साथ अपने आसपास के लोगों के स्वास्थय को भी हानि पहुँचाते हैं। प्रकृति ने हमारा शरीर धूम्रपान से धुएँ को अंदर लेने के लिये नहीं बनाया है। किंतु जब इसमें कोई व्यक्ति जबरदस्ती दूषित हवा का संचार करता है, तो इससे फेफड़ों, गले और लीवर आदि मुख्य अंगों पर दुष्प्रभाव होता है। बाद में, लाखों रुपये लगाकर लोग इन्हें ठीक करने के प्रयत्न करते हैं, जिनमें से अधिकांश लोगों की इन्हीं अंगों के विकृत हो जाने से मृत्यु हो जाती है।

इसका प्रभाव सिर्फ शारीरिक संरचना पर ही नहीं बल्कि मन पर भी होता है। मन में धूम्रपान और नशे से संबंधित विचार ही चक्कर लगाते रहते हैं। उन्हीं इच्छाओँ को पूरा करने के लिये व्यक्ति फिर से धूम्रपान करता है। और यही प्रकिया लगातार चलती रहती है अंतत: व्यक्ति को इसकी लत हो जाती है। केवल इतना ही नहीं, फलस्वरूप, व्यक्ति चिड़चिड़ा, गुस्सैल, अस्थिर मनस्थिति का, आवारा और लगभग पागल-सा हो जाता है।

धूम्रपान का समाज पर कुप्रभाव

समाज में ही धूम्रप्रान करने वाले लोग रहते हैं। उनकी विचारों और कर्मों को अन्य बच्चे और किशोर देखते हैं और अपनी नासमझी के कारण उनके फेर में पड़ जाते हैं। बहुधा ये देखा जाता है कि ऐसे किशोर धूम्रपान आदि नशों की लत के बाद अपने घर छोड़कर दयनीय जीवन बिताने लगते हैं।

धूम्रपान करने वाले दोस्तों और साथियों की संगति भी हानिकारक ही होती है। यह संक्रामक रोग तो नहीं है पर तेजी से फैलता अवश्य है। समाज के ऐसे समूह में उठने-बैठने से ही किशोर छात्र धूम्रपान और नशे जैसे व्यसनों में फँस जाते हैं। ऊपर से माता-पिता की ओर से भी उन्हें सकारात्मक रवैया नहीं मिलता। अंतत: वे बच्चे अपनी जीवन आप ही बिगाड़ लेते हैं।

धूम्रपान पर प्रतिबंध की आवश्यकता

नि:सन्देह आज हम सभी समझते हैं कि धूम्रपान पर प्रतिबंध लगाना ही चाहिए। यही देश और समाज की जरूरत है। यदि समय से ऐसा नहीं किया जाता तो हमारा पूरा युवा वर्ग धूम्रपान की गहरी खाई में गिरता जाएगा, जिससे निकलना लगभग असंभव ही है। इससे हमारा पतन शारीरिक और मानसिक स्तर पर ही नहीं बल्कि पूरे जीवन बर्बाद चला जाता है।

धूम्रपान को प्रतिबंधित करने के लिये सर्वप्रथम सर्वसम्मति से सभी राजनैतिक पार्टियों को आगे आना चाहिए। स्कूलों और कॉलेजों में सामाजिक संस्थाओं को धूम्रपान के प्रति जागरुकता अभियान चलाने चाहिए जिससे उन युवाओं तक पहुँचा जा सके जो इसकी गिरफ्त में हैं या आ सकते हैं। सभी माता-पिताओं को भी अपने बच्चों को इसके हानियों को जिम्मेदारी के साथ बताना चाहिए। हम अक्सर देखते हैं जो माता-पिता बच्चों को इन जानकारियों के प्रति अंधेरे में रखते हैं वे उनका अहित ही करते हैं। परिणाम यह होता है कि बच्चे उसी मार्ग पर चल देते हैं, और माता-पिता को भनक तक नहीं लगती। इसीलिये धूम्रपान पर प्रतिबंध लगाना आज पूरे समाज की अहम आवश्यकता है।

उपसंहार

ऐसा नहीं है कि धूम्रपान करने वाले इसकी हानियों से पूरी तरह अनभिज्ञ ही रहते हैं। कुछ पढ़-लिखे लोग भी सब कुछ जानते हुए भी इसे मनोरंजन का एक तरीका समझते हैं। गौरतलब ये भी है कि वे अपनी मनोरंजन की उजड़ी हुई परिभाषा को भी सुधारना नहीं चाहते। स्वयं अंधेरे में जीवनयापन करते हैं और अपने परिवार के साथ-साथ समाज और देश के भविष्य को अंधेरी गर्तों में धकेलते हैं। यदि आप भी धूम्रपान करते हैं और ये मानते हैं कि आपको इसकी लत हो गई है तो घबराने के बजाए किसी डॉक्टर, आयुर्वेद के ज्ञाता या किसी सही मार्गदर्शक के पास जाकर उचित सलाह लें। आप निश्चित ही सही जीवन की पटरी पर वापस लौटेंगे, हमारी शुभकामना के साथ।

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विनम्र अनुरोध:

इस तरह “धूम्रपान पर प्रतिबंध हिंदी निबंध / धूम्रपान निषेध पर निबंध  ( Hindi Essay on Smoking ban)” यहीं पूरा होता है। हमने अपना सर्वश्रेष्ठ देते हुए पूरी कोशिश की है कि इस हिंदी निबंध में किसी भी प्रकार की त्रुटि ना हो। फिर भी यदि आप को इस निबंध में कोई गलती दिखती है तो आप अपना बहुमूल्य सुझाव ईमेल के द्वारा दे सकते है। ताकि हम आपको निरन्तर बिना किसी त्रुटि के लेख प्रस्तुत कर सकें।

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