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नशा मुक्ति पर निबंध


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नशा मुक्ति पर निबंध
Nasha Mukti par Nibandh in Hindi
Essay on Drug Addiction in Hindi


प्रस्तावना

दुनिया में सब ओर अजीब से हालात देखने को मिलते हैं। एक ओर जहाँ कुछ लोगों के प्रयासों से बड़े-बड़े महान कार्य सिद्ध हो रहे हैं वही दूसरी ओर अधिकतर लोग व्यसनों और नशों में डूबकर अपने सर्वस्व नष्ट करने में लगे हुए हैं। ऐसा नहीं है कि वे लोग एक खुशहाल जिंदगी नहीं चाहते, पर शायद उन्होंने खुशहाल जिंदगी का तात्पर्य सिर्फ नशे और व्यसनों को ही समझा है। नशे का शिकार किशोर और युवा वर्ग अधिक होता है। इसका कारण उनकी अविवेक के साथ-साथ सकारात्मक मार्गदर्शन का नहीं मिल पाना है। केवल उचित संगति और मार्गदर्शन ही नशे के चक्रव्यूह से युवाओं को अवश्य निकाल सकता है। आइये इसका विस्तार, हमारे जीवन पर प्रभाव और मुक्ति के उपाय जानें।

नशा : मनोरंजन का खतरनाक तरीका

अधिकतर लोग नशे को मनोरंजन के तौर पर शुरु करते हैं। दोस्तों के साथ एक आकर्षण की वजह उनका झुकाव नशे की तरफ हो जाता है। और धीरे-धीरे कब उन्हें इसकी लत लग जाती है, इसका पता भी नहीं चलता। किशोरों को इससे होने वाली हानियों का ज्ञान नहीं होता, वे इसे एक सामान्य घटना की तरह ही देखते हैं।

10-12 साल के छोटे बच्चे भी नशा करते देखे जाते हैं। वे समझते हैं नशा करना, एक प्रकार बड़ा होने का सबूत है। प्रकृति ने जो शरीर दिया है हम उसका सदुपयोग न करके नशा और धूम्रपान जैसे व्यसनों से उसे बिगाड़ रहे हैं। इसका खामियाजा भी हमें ही भुगतना पड़ता है। यह आदत जिसमें अभी हमें आनंद आता है, बाद में हमारे गले की रस्सी बन जाती है और हमें तेजी से मौत की ओर धकेलती है।

नशे के मूल कारण

कोई भी व्यक्ति नशा अपने अज्ञान के कारण ही नशा करता है। अगर उस व्यक्ति को सही जानकारी, जागरुकता  प्रदान की जाए तो वह नशे को अपने लिये हानिकारक समझकर छोड़ देगा। कॉलेजों में जो विद्यार्थी नशा और धूम्रपान करते हैं, उन्हें स्मार्ट और कूल समझा जाता है। उन्हीं विद्यार्थियों की देखा-देखी अन्य छात्र भी नशा शुरु कर देते हैं।

शिक्षकों और समाज का अनुचित और अंधा मार्गदर्शन ही इसका मूल कारण है। कोई शिक्षक और समाज इसे समस्या न मानकर एक सामान्य शौक समझते हैं। क्योंकि उन्हें शरीर और मन की कार्यप्रणाली का पर्याप्त ज्ञान नहीं है।

नशे के शारीरिक और मानसिक कुप्रभाव

शरीर के स्तर पर नशे की वजह बहुत सारे जहरीले तत्व हमें प्रभावित करते हैं। यह बिल्कुल ऐसा है जैसे आप एक उच्च गुणवत्ता वाली गाड़ी को घटिया डीजल या पेट्रोल से चला रहे हों। नशा करते समय हम जो सुख और आनंद अनुभव करते हैं वह भविष्य में हमारे प्राण लेने वाला हो जाता है।

मानसिक स्तर पर इसके कुप्रभाव बहुत गहन हैं। नशा करने वाला इंसान अपने परिवार को छोड़कर अधिकतर समय आवारा लोगों के साथ बिताता है। वह समाज में एक सम्माननीय पद नहीं पा पाता और अपने बहुमूल्य जीवन को व्यर्थ जाते देखते हुए भी अपनी आदत के चलते कुछ नहीं कर पाता। उसके परिवार के लिये यह बहुत दुखद और शर्मनाक होता है। 

नशे से मुक्ति के उपाय

  • नशे से मुक्ति पाने के लिये कई उपाय हैं। किंतु सभी उपायों में व्यक्ति को अपने मन में धैर्य और अनुशासन रखना अनिवार्य है, तभी कोई सकारात्मक लाभ हो सकता है।
  • आजकल नशे की लत को शरीर से दूर करने के लिये कई आयुर्वैदिक और एलोपैथिक दवाएं भी बाजार में उपलब्ध हैं। उनका उपयोग किसी अच्छे डॉक्टर की सलाह लेकर करना चाहिए।
  • परिवार और समाज से अधिक मेलजोल बढ़ाकर और अच्छी पुस्तकों की संगति से नशा करने के विचारों को हटाया जा सकता है। हमारे चरित्र और कार्यों में संगति बहुत अधिक महत्व रखती है।
  • यदि व्यक्ति अपना ध्यान कोई नया कौशल सीखने या किसी कौशल को सुधारने में लगाए तो उसका नशे की ओर झुकाव भी कम होगा और अपने कौशल में गुणवत्ता भी मिलेगी।

उपसंहार

नशा व्यक्ति के शरीर और मन को भी नहीं आत्मा को भी नुकसान पहुँचाता है। व्यक्ति नशे के लत को पूरा करने के लिये चोरियाँ और किसी की हत्या करने से भी नहीं चूकता। शुरु-शुरु में जो काम हमें सुख देता है, वह धीरे-धीरे हमारे सारे जीवन को खा जाता है। इसीलिये यदि समय रहते नशे से मुक्त होने के सही प्रयास किये जाएं तो निश्चित ही इसे दूर किया जा सकता है। संसार में मनोरंजन के कई ज्ञानवर्धक, स्वास्थयवर्धक तरीके उपलब्ध हैं, इसीलिये नशे को मनोरंजन की तरह देखना मूर्खता है। नशा और धूम्रपान करते हुए जरा, खुद को शीशे में देखिये तो सही, आप खुद के साथ कितना अनर्थ कर रहे हैं।

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