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स्वच्छता के महत्व पर निबंध

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स्वच्छता के महत्व पर निबंध
Swachata ke Mahtva par Nibandh



स्वच्छता यानि सफाई, जो हमारे स्वस्थ जीवन के लिए बहुत ज़रूरी है। हम सबका यह कर्तव्य है कि हम सब मिलकर खुद को, समाज को एवं पर्यावरण को स्वच्छ बनाएं। क्योंकि गंदगी हज़ार तरह की बीमारियां उत्पन्न करती है। स्वच्छ वातावरण होने से हम बीमारी से तो बचते ही हैं, साथ ही हमारे स्वास्थ्य पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है।

इसलिए कहा भी गया है कि “यदि बीमारियों को दूर भगाना है, तो स्वच्छता को हमें अपनाना होगा।”

व्यक्ति सुबह उठकर सबसे पहले खुद की सफाई करता है, यानि ब्रश करता है, नहाता है, साफ सुथरे कपड़े पहनता है। उसके बाद अपने घर को साफ करता है। लेकिन वह अपने घर के आस पास के वातावरण पर ध्यान नहीं देता, उसे गंदा करता है। लेकिन एक साफ़-सुथरा बीमारी से मुक्त जीवन जीने के लिए व्यक्ति को खुद की और अपने घर की साफ़ सफाई के साथ ही अपने घर के बाहर और अपने शहर को भी साफ रखना चाहिए।


प्रस्तावना (Introduction) –

व्यक्ति के जीवन में जिस तरह भोजन और पानी ज़रूरी है, उसी तरह सफ़ाई भी बहुत आवश्यक है। एक सभ्य जीवन के लिए सफाई का बहुत अधिक महत्व है। यहां तक कि हर धर्म में भी सफाई के बारे में लोगों को बताया गया है। क्योंकि स्वच्छ वातावरण में इंसान का मन शांत होता है और वह शांति से ईश्वर को याद कर सकता है। इसकेे अलावा स्वच्छ वातावरण में इंसान में सोचने समझने की शक्ति बढ़ती है और उसके दिमाग में उन्नति करने के नये नये विचार आते हैं।

स्वच्छता का महत्व (Importance of Cleanliness in Hindi) –

कूड़ा-कचरा, मैल, गंदगी आदि से कीटाणु पनपते हैं और कीटाणु हज़ार तरह की बीमारियों को जन्म देते हैं। यदि आप कहीं बाहर थूकते हैं तो आप थूककर उस जगह से अपने घर तो वापस चले जाते हैं, लेकिन उस थूक से उत्पन्न होने वाली बीमारी हमारे घर तक पहुंच जाती है। और हमेशा हमेशा के लिए हमारे जीवन का हिस्सा बन जाती है। इसके अतिरिक्त यदि हम सफाई रखते हैं तो बीमारियां हमसे दूर भाग जाती हैं। 

सफ़ाई के महत्व कोे हम इस बात से भी समझ सकते हैं कि कोरोना जैसी महामारी में सफाई पर कितना ज़ोर दिया जा रहा है। क्योंकि यह एक ऐसी खतरनाक वैश्विक महामारी है, जो गंदगी से बढ़ती है। इसलिए लोग इससे बचने के लिए हर तरह से सफाई पर ध्यान दे रहे हैं। सैनिटाइजर का इस्तेमाल कर रहे हैं।

स्वच्छता में क्या क्या चीज़ें आवश्यक हैं (What are the Things Needed in Cleanliness)?

स्वच्छता में जो चीज़ें आती हैं, वो तो सबसे पहले अपने शरीर की सफ़ाई है। शरीर की सफ़ाई में नहाना, दांतों को साफ़ करना, कानों की सफ़ाई करना, नाखूनों की सफ़ाई करना, साफ़ सुथरे कपड़े पहन्ना आदि शामिल है। 

वहीं स्वच्छता में जो दूसरी चीज़ आती है, वह अपने घर की सफ़ाई करना है। घर की सफाई में कमरों को अच्छी तरह साफ करना, टॉयलेट साफ़ करना, बाथरूम आदि की सफाई शामिल है। इसके अलावा किचेन को साफ़ सुथरा रखना भी बहुत आवश्यक है, जिससे कि खाना साफ़ सुथरा और स्वस्थ्य बने। 

केवल बाहरी सफाई ही नहीं, बल्कि घर की अंदरूनी सफाई भी बहुत ज़रूरी है। जिसके लिए हम डेटॉल, सैनिटाइजर, फिनायल जैसी चीज़ों का उपयोग कर सकते हैं। डेटॉल और सैनिटाइजर जहां आपकी बॉडी के लिए यूजफुल है, वहीं फिनायल आपके घर को कीटाणु से मुक्त करने के लिए आवश्यक है।

इसके अलावा शरीर और घर की स्वच्छता के बाद आपको अपने आस-पड़ोस की सफाई का भी ध्यान रखना चाहिए। और उसे सुंदर व स्वच्छ बनाने का प्रयास करना चाहिए। अपने आस पास के तालाब और नदियों को गंदा होने से बचाना चाहिए। जब हम अपने आस पास के क्षेत्र को साफ़ करेंगे तो अन्य लोग भी हमें देखकर अपने घर के बाहर सफाई का ध्यान रखेंगे। ऐसा करने से हमारा क्षेत्र तो साफ़ सुथरा होगा ही, साथ ही पूरा शहर और फिर पूरा देश स्वच्छ होगा।

स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत (Swachh Bharat Abhiyan Launched) –

स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत सबसे पहले देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने की थी, जिसके द्वारा उन्होंने सफ़ाई पर ज़ोर दिया था।  इस अभियान को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 में यानि गांधी जयंती पर फिर से शुरू किया। इस अभियान में देश की बड़ी-बड़ी हस्तियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। 

स्वच्छ भारत अभियान के तहत नदियों, नालों, तालाबों और देश के अन्य कोनों की सफाई की गई। प्लास्टिक जैसी खतरनाक और नष्ट न होने वाली चीज़ों पर प्रतिबंध लगाया गया। गांव में जहां जहां श्वचालय नहीं थे, वहां वहां श्वचालय बनवाए गए। 

बीमारियों का सबसे बड़ा कारण है गंदगी (Dirt is the Biggest Cause of Diseases) –

गंदगी से न केवल इंसान बीमार पड़ता है, बल्कि जीव-जंतु सब दूषित पर्यावरण से बीमार पड़ जाते हैं। सड़कों पर पड़ा कूड़ा, लोगों का खुले में थूकना, प्लास्टिक को बाहर फेंकना, यह सभी चीज़ें हमारे आस-पास के वातावरण को प्रदूषित कर देती हैं। 

स्वच्छ वातावरण का निर्माण कैसे करें (How to Create Clean Environment)?

यदि हम चाहते हैं कि हम एक स्वच्छ वातावरण में जीवन बिताएं और बीमारियां आपसे कोसों दूर रहें तो हमें निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना होगा –

• खुद की और अपने घर की सफाई के साथ ही अपने आस-पड़ोस की भी सफाई का ख्याल रखें।

• बच्चों को अच्छी आदतें सिखाएं, जिससे कि वो खुद की और पर्यावरण की स्वच्छता का ख्याल रखें। और बड़े होने के बाद भी उनमें सफाई की आदत बनी रहे।

• प्लास्टिक के इस्तेमाल से बचें, क्योंकि प्लास्टिक नष्ट नहीं होती और यह प्रदूषण का कारण बनती है, जिससे अनेक प्रकार की बीमारियां जन्म लेती हैं। वहीं प्लास्टिक बाहर पड़ी रहने से गलती से जानवरों के पेट में जाने से उनकी मौत हो जाती है।

• नदियों में नहाने और कपड़े धोने जैसे कार्य से बचना चाहिए और सरकार को भी नदियों तालाबों में नहाने और कपड़ा आदि धोने पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।

• सार्वजनिक जगहों पर सफाई रखना भी सरकार और आम जनता दोनों का कर्तव्य है।

• हम खुद की सफाई, अपने घर की सफाई, अपने पर्यावरण की सफाई भी तभी कर पाएंगे, जब हमारे मन में शुद्धता होगी। इसलिए अपने मन को साफ रखना भी हमारे लिए बेहद जरूरी है।

निष्कर्ष (Conclusion) –

पर्यावरण को स्वच्छ बनाना केवल सरकार या एक व्यक्ति का काम नहीं है। इसे साफ सुथरा और सुंदर बनाने के लिए सरकार और हम सबको मिलकर प्रयत्न करने होंगे। हमें खुद में और अपने बच्चों में अच्छी आदतें डालनी होंगी।  यह देश हमारा है, हम इस देश के नागरिक हैं। इसलिए इस देश को स्वच्छ बनाना भी हम सबका काम है। और अपने पर्यावरण को साफ़ रखने में भी हमारी ही भलाई है, क्योंकि साफ़ सुथरा वातावरण हमें लंबा और जीवन जीने में मदद करता है।

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