📢 भारतीय स्वतंत्रता के 75 साल – Essay on 75 years of Indian Independence in Hindi
🔥 Join eWritingCafe Telegram for latest Essay topics
[Essay On 75th Independence Day Of India] [Azadi Ka Amrit Mahotsav Essay in English]

ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध (Global Warming Essay in Hindi)

ajax loader


👀 इस पेज पर नीचे लिखा हुआ Global Warming Essay in Hindi (ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध) आप को अपने स्कूल या फिर कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए निबंध लिखने में सहायता कर सकता है। आपको हमारे इस वेबसाइट पर और भी कई विषयों पर हिंदी में निबंध मिलेंगे (👉 निबंध सूचकांक), जिन्हे आप पढ़ सकते है, तथा आप उन सब विषयों पर अपना निबंध लिख कर साझा कर सकते हैं

ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध (Global Warming Essay in Hindi)
ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध (Global Warming Essay in Hindi)

Global Warming Essay in Hindi
ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध


ग्लोबल वार्मिंग यानि धरती पर तापमान का बढ़ना एक ऐसी समस्या है, जिससे आज पूरी दुनिया जूझ रही है। ग्लोबल वार्मिंग का कारण भी मनुष्य ही है, जिसने ग्लोबल वार्मिंग में बढ़ोत्तरी की है। इसलिए इसका समाधान भी हम सबको मिलकर ही करना होगा। तो आइए जानते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग क्या है और इसके कारण व उपाय क्या क्या हैं।


🗣️ ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध (Global Warming Essay in Hindi) पर यह निबंध बच्चो (kids) और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है।

प्रस्तावना (Introduction) –

ग्लोबल वार्मिंग एक ऐसी समस्या है, जिससे न केवल मनुष्य को परेशानी हो रही है, बल्कि धरती पर रह रहे अन्य प्राणियों को भी ग्लोबल वार्मिंग का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। ग्लोबल वार्मिंग से न केवल हमारा देश लड़ रहा है, बल्कि विश्व के अन्य देश भी इससे छुटकारा पाने में हर संभव प्रयास कर रहे हैं। लेकिन फिर भी ग्लोबल वार्मिंग की समस्या घटने की बजाए निरंतर बढ़ती ही जा रही है। 

ग्लोबल वार्मिंग का सबसे बड़ा ज़िम्मेदार मनुष्य ही है। मानव की ही गतिविधियों के कारण धरती पर ग्लोबल वार्मिंग की समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। मानव की अजीबो गरीब गतिविधियों के कारण ही धरती पर खतरनाक व हानिकारक गैस कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, मीथेन इत्यादी ग्रीन हाउस गैसें हमारे वातावरण में बढ़ती जा रही हैं और ग्लोबल वार्मिंग का कारण बन रही हैं।

ग्लोबल वार्मिंग क्या है (What is Global Warming)?

पृथ्वी के वातावरण के तापमान में किसी भी तरह की वृद्धि होने पर ग्लोबल वार्मिंग की स्थिति उत्पन्न होती है। अगर आसान भाषा में कहें तो ग्लोबल वार्मिंग ग्रीन हाउस गैसों – मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड आदि के कारण पृथ्वी के वातावरण के तापमान के बढ़ने से होती है।

यदि ग्लोबल वार्मिंग की समस्या का जल्द से जल्द समाधान नहीं किया गया तो आने वाले समय में हमारा धरती पर नामों निशान तक नहीं रहेगा। पृथ्वी पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।

ग्लोबल वार्मिंग की परिभाषा क्या है (Definition of Global Warming in Hindi) – 

धरती के वातावरण के तापमान में निरंतर होने वाली बढ़ोत्तरी ही ग्लोबल वार्मिंग कहलाती है।  

ग्लोबल वार्मिंग एक बहुत बड़ी पर्यावरण समस्या है, जिसके प्रभाव के कारण अब तक लगभग दस लाख से भी अधिक प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं। यह पूरे देश की नहीं, बल्कि पूरे विश्व की समस्या है। 

ग्लोबल वार्मिंग के कारण (Cause of Global Warming) –

ग्लोबल वार्मिंग के एक नहीं अनेक कारण हैं, जिनके बारे में हम आपको नीचे बताने जा रहे हैं –

(1) ग्रीन हाउस का प्रभाव (Greenhouse Effect) –

ग्रीन हाउस प्रभाव ग्लोबल वार्मिंग का सबसे मुख्य कारण है। ग्रीन हाउस के प्रभाव से पृथ्वी की सतह गर्म होती है, जिसके कारण धरती पर रह रहे प्राणियों का जीवन संभव होता है। ग्रीन हाउस की गैसे (मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड आदि) जब हद से ज़्यादा बढ़ जाती हैं तो मौसम और प्राणियों दोनों के लिए हानिकारक होती हैं। यानी ग्रीन हाउस इफेक्ट ही ग्लोबल वार्मिंग की मुख्य वजह है।

(2) प्रदूषणों के कारण (Cause of Pollutions) –

ग्लोबल वार्मिंग की एक मुख्य वजह विभिन्न प्रकार के प्रदूषण भी हैं। प्रदूषण जैसे – वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, मृदा प्रदूषण इत्यादि के कारण पृथ्वी का तापमान बढ़ जाता है और फिर वही ग्लोबल वार्मिंग की वजह बनता है। 

(3) जनसंख्या में वृद्धि होना (Increase in Population) –

ग्लोबल वार्मिंग का कारण जनसंख्या में वृद्धि का होना भी है। धरती पर मानव की संख्या अधिक होने के कारण वो अपने रहने के लिए लगातार वनों और पेड़ पौधों की कटाई कर रहा है, और यही चीज़ ग्लोबल वार्मिंग को जन्म दे रही है।

(4) वनों की अत्यधिक कटाई (Excessive Deforestation) –

वनों का हद से ज़्यादा कटना भी ग्लोबल वार्मिंग की मुख्य वजह है। क्योंकि वनों की अधाधुंध कटाई से वातावरण में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी ग्रीन हाउस गैसों से वातावरण का तापमान बढ़ जाता है तथा ग्लोबल वार्मिंग की समस्या पैदा हो जाती है।

ग्लोबल वार्मिंग रोकने के उपाय (Ways to Control Global Warming) –

ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए आपको बहुत ज़्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं है। यदि आप छोटी छोटी चीजों पर भी ध्यान देंगे तो ग्लोबल वार्मिंग जैसी बड़ी समस्याओं से बचेंगे। तो आईए जानते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग को कंट्रोल करने के कौन-कौन से उपाय हैं –

• ज़्यादा से ज़्यादा पेड़ लगाएं, जिससे कि अधिक से अधिक ऑक्सीजन उत्पन्न हो और कार्बन डाइऑक्साइड व मीथेन जैसी हानिकारक गैसों के प्रभाव को कम कर सके।

• प्लास्टिक के इस्तेमाल से बचें और कोल्ड्रिंक व जूस जैसी चीज़ों को प्लास्टिक में लेने कि बजाए शीशे की बोतल में लें। क्योंकि प्लास्टिक का कचरा ही सबसे ज़्यादा ग्लोबल वार्मिंग का कारण बनता है।

• बाइक और कार की बजाए साइकिल का इस्तेमाल करें और अगर कहीं पास में जाना हो तो आप पैदल भी जा सकते हैं। ऐसा करने से बाइक और कार से निकलने वाले धुएं से वायु प्रदूषण में कमी होगी और ग्लोबल वार्मिंग की समस्या को कंट्रोल किया जा सकेगा।

• कपड़े या बर्तन धोते समय आप इस बात का ध्यान रखें कि साबुन व डिटर्जेंट का कम से कम प्रयोग करें। क्योंकि यही साबुन और डिटर्जेंट नदी के पानी में मिलकर जल प्रदूषण का कारण बनते हैं और ग्लोबल वार्मिंग की समस्या को बढ़ाते हैं।

• जनसंख्या वृद्धि पर कंट्रोल करें। आपने यह कहावत तो सुनी ही होगी कि हम दो और हमारे दो। यदि जनसंख्या कम होगी तो लोगों की आवश्यकताएं कम होंगी और जब ज़रूरतें कम होंगी तो प्रदूषण कम होगा। और इससे ग्लोबल वार्मिंग की समस्या पर कंट्रोल पाया जा सकेगा।

निष्कर्ष (Conclusion) –

ग्लोबल वार्मिंग एक ऐसी समस्या है, जिससे पूरे देश को नहीं, बल्कि पूरे विश्व को खतरा है। इसका समाधान हम सबको मिलकर करना होगा। यदि हमने ऐसा नहीं किया तो भविष्य में शायद ही पृथ्वी पर हमारा अस्तित्व बच सके। इसलिए अगर हम चाहते हैं कि आने वाला समय हमारे लिए बड़ा संकट न खड़ा करे तो हमें इससे बचने के लिए स्वयं प्रयास करना होगा। हमें ज़्यादा से ज़्यादा पेड़ लगाने होंगे। अपनी आवश्यकताओं को कम करके प्रदूषण को कम करना होगा। तभी हम ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्या पर नियंत्रण पा सकेंगे।

👉 यदि आपको यह लिखा हुआ ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध – Global Warming Essay in Hindi पसंद आया हो, तो इस निबंध को आप अपने दोस्तों के साथ साझा करके उनकी मदद कर सकते हैं




निबंध 2 (1400+ शब्द) ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध हिंदी में

🗣️ ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध (Global Warming Essay in Hindi) पर यह निबंध बच्चो (kids) और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12, कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए और अन्य विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए लिखा गया है।

प्रस्तावना – 

ग्लोबल वार्मिंग अर्थात भूमंडलीय ऊष्मीकरण पिछले कुछ दशकों में पृथ्वी पर रहने वाले समस्त सजीवों के लिए एक बहुत बड़ा संकट बनकर उभरा है।

मनुष्य ने आधुनिक युग में तकनीक, विज्ञान एवं अपनी जीवनशैली में अत्यधिक प्रगति की है परंतु प्रगति की इस अंधी दौड़ में हमने जाने-अनजाने नए संकटों को जन्म भी दे दिया है। 

ग्लोबल वार्मिंग भी एक ऐसा ही संकट है जिसका यदि समय रहते निदान नहीं किया गया या इसकी तीव्रता कम न की गयी तो यह पृथ्वी पर जीवन के लिये खतरा बन जायेगा।

पृथ्वी पर वायुमंडल एवं समुद्र का तापमान बढ़ने से असामयिक, अनियमित एवं अत्यधिक वर्षा हो सकती है, बाढ़ आ सकती है एवं सूखा व भूकंप जैसी अनेक प्राकृतिक आपदाएं जन्म ले सकती हैं।

अतः ग्लोबल वार्मिंग के विषय में हम सभी का जागरुक होना अति आवश्यक है। यदि हम इसके कारणों को समझ सकें तो निश्चित रूप से ग्लोबल वार्मिंग के तीव्र प्रभाव को कम कर सकते हैं।

ग्लोबल वार्मिंग का अर्थ –

ग्लोबल वार्मिंग निम्नलिखित दो शब्दों से मिलकर बना है –

ग्लोबल + वार्मिंग = ग्लोबल वार्मिंग

ग्लोबल शब्द का अर्थ है वैश्विक यानी सम्पूर्ण विश्व का, और वार्मिंग का अर्थ है ऊष्मीकरण यानी गर्म हो जाना। अतः सम्पूर्ण पृथ्वी के औसत तापमान का सामान्य से अधिक हो जाना ही ग्लोबल वार्मिंग अर्थात भूमंडलीय ऊष्मीकरण कहलाता है।

ग्लोबल वार्मिंग से अभिप्राय हमारी पृथ्वी पर बढ़ती हुई गर्मी की उस मात्रा से है जो लौटती हुई सूर्य की किरणों के ग्रीनहाउस गैसों द्वारा अवशोषित किये जाने से उत्पन्न हुई है। 

ग्लोबल वार्मिंग के मुख्य कारण – 

ग्लोबल वार्मिंग के मुख्य कारणों को हम दो भागों में वर्गीकृत कर सकते हैं –

  1. प्राकृतिक कारण 
  2. मानव जनित कारण

1) प्राकृतिक कारण – 

ग्लोबल वार्मिंग के मुख्य प्राकृतिक कारण निम्नलिखित हैं –

◆ वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों की उपस्थिति –

ग्रीनहाउस गैसें पृथ्वी पर ग्लोबल वार्मिंग बढ़ने का सबसे बड़ा कारण हैं।

हमारी पृथ्वी वायुमंडल अर्थात गैसों के आवरण से ढकी हुई है। इस आवरण में कुछ गैसें ऐसी भी हैं जो ऊष्मा को सोखने की क्षमता रखती हैं। जब सूर्य की गर्म किरणें पृथ्वी पर आती हैं तो उनकी ऊष्मा का कुछ भाग धरती और समुद्र के जल द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है तथा उसके बाद पृथ्वी से टकराकर ये किरणें वापस चली जाती हैं। ग्रीनहाउस गैसें इन लौटती हुई गर्म किरणों में से कुछ को रोककर अवशोषित कर लेती हैं जिससे वायुमंडल के तापमान में अतिरिक्त वृद्धि हो जाती है जोकि ग्लोबल वार्मिंग का मुख्य कारण है।

सूर्य के सापेक्ष पृथ्वी की स्थिति में परिवर्तन –

पृथ्वी सूर्य के चारों तरफ अपनी कक्षा में परिक्रमा करती है। सूर्य के आकर्षण के कारण पृथ्वी जब सूर्य के निकट आती है तो पृथ्वी के औसत तापमान में भी आंशिक वृद्धि हो जाती है।

ओज़ोन परत में छेद –

ओज़ोन परत में छेद हो जाने के कारण सूर्य की अवांछित ऊष्मा भी पृथ्वी तक पहुंच जाती है जोकि ग्लोबल वार्मिंग बढ़ाने में सहायता करती है।

पर्याप्त जंगलों का अभाव – 

पेड़-पौधे कार्बन डाई ऑक्साइड जैसी कई मुख्य ग्रीनहाउस गैसों को अवशोषित करके ऑक्सीजन उत्सर्जित करते हैं। ऐसे में प्राकृतिक रूप से पृथ्वी के हर हिस्से में जंगल या पर्याप्त पेड़ पौधे ना होने के कारण भी ग्लोबल वार्मिग बढ़ती जा रही है।

2. मानवजनित कारण – 

ग्लोबल वार्मिंग के कुछ मानवजनित कारण निम्नलिखित हैं –

◆ कल-कारखानों की बढ़ती संख्या – 

आधुनिक काल में जीवन को सुलभ बनाने के लिये विभिन्न प्रकार के उत्पाद कारखानों में बहुत बड़ी मात्रा में बनाये जाते हैं। इन उत्पादों की निर्माण प्रक्रिया में कारखानों में से बड़ी मात्रा में ग्रीनहाउस गैसें उत्सर्जित होती हैं जो ग्लोबल वार्मिंग का कारण बनती हैं।

◆ पेड़ पौधों की अंधाधुंध कटाई – 

बड़ी मात्रा में कार्बन डाई ऑक्साइड को ग्रहण करने वाले वनों के काटे जाने से वायुमंडल में कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा बढ़ गयी है जिसके फलस्वरूप भूमंडलीय तापमान में वृद्धि होती जा रही है।

यातायात प्रदूषण – 

एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने तथा सामान ले जाने के लिए वाहनों में विभिन्न प्रकार का ईंधन प्रयोग में लाया जाता है जिससे बड़ी मात्रा में प्रदूषण व हानिकारक गैसें उत्सर्जित होती हैं।

बढ़ती जनसंख्या – 

जनसंख्या बढ़ने से प्राकृतिक संसाधनों का दोहन अपने चरम पर है जिसके कारण पृथ्वी का औसत तापमान पिछली सदी की तुलना में काफी बढ़ गया है। जनसंख्या बढ़ने से ए०सी०, फ्रिज, कंप्यूटर आदि की मांग में वृद्धि हुई है जिससे पर्यावरण पर विपरीत प्रभाव पड़ा है।

विद्युत संयंत्र – 

बिजली निर्माण में बहुत बड़ी मात्रा में ग्रीनहाउस गैसें उत्सर्जित होती हैं जिससे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

प्रमुख ग्रीनहाउस गैसें –

ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में मुख्य रूप से विद्युत पावरहाउस, औद्योगिकीकरण, वाहन प्रदूषण, कृषि उत्पादन, जीवाश्म ईंधन, बायोमास का दहन इत्यादि सम्मिलित हैं।

प्रमुख ग्रीनहाउस गैसें जिनके कारण ग्लोबल वार्मिंग बढ़ती जा रही है, निम्नलिखित हैं – 

  1. कार्बन डाई ऑक्साइड
  2. नाइट्रस ऑक्साइड
  3. मीथेन
  4. क्लोरो – फ्लोरो कार्बन
  5. वाष्प एवं ओज़ोन इत्यादि।

ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव – 

पिछली सदी की तुलना में पृथ्वी का औसत तापमान 1°C तक बढ़ चुका है। यदि विशेषज्ञों की मानें तो अगली सदी तक यह वृद्धि 0.3 प्रतिशत से 0.7 प्रतिशत तक और भी बढ़ सकती है। पिछले 15 वर्षों में अकेले कार्बन डाइऑक्साइड का ही उत्सर्जन 40 गुना तक बढ़ गया है।

पिछले कुछ वर्षों में ग्लोबल वार्मिंग के फलस्वरूप सामान्य जलवायु एवं मौसमों में परिवर्तन दृष्टिगोचर हुए हैं। इसके अतिरिक्त ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी पर निम्नलिखित परिवर्तन हो रहे हैं –

◆ मरुस्थलों का विस्तार, 

◆ गर्म हवा अर्थात लू में वृद्धि, 

◆ ग्लेशियर और भूतल पर हिम का पिघलना, 

◆ अनियमित और भारी वर्षा,

◆ समुद्र जल स्तर में वृद्धि, 

◆ बाढ़ एवं भूस्खलन,

◆ जंगलों की आग में वृद्धि इत्यादि।

अधिक वाष्पीकरण और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन के कारण वायुमंडल का तापमान बढ़ रहा है जिससे पृथ्वी पर गैसों का प्राकृतिक आवरण और भी मोटा होता जा रहा है जिससे सूर्य की अधिक ऊष्मा पृथ्वी पर रुक रही है। फलस्वरूप ग्लोबल वार्मिंग और भी तेजी से बढ़ रही है। आने वाले वर्षों में यदि इसी तरह पृथ्वी पर तापमान बढ़ता रहा तो निश्चित रूप से निकट भविष्य में पृथ्वी पर जीवन दुर्गम हो जाएगा। 

ग्लोबल वार्मिंग रोकने के प्रयास – 

समय-समय पर मनुष्य जाति द्वारा ग्लोबल वार्मिंग रोकने के कई प्रयास किये गए हैं और वर्तमान में भी ये प्रयास जारी हैं।

ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को रोकने के लिए क्योटो प्रोटोकोल की अंतर्राष्ट्रीय ट्रीटी कई देशों द्वारा स्वीकार की गई जिसमें सभी देशों को अपने कार्बन फुटप्रिंट कम करने अर्थात ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में सावधानी बरतने को कहा गया। 

2015 के पेरिस समझौते के तहत, देशों ने मिलकर यह तय किया कि ग्लोबल वार्मिंग की मात्रा को 2℃ से नीचे रखा जाएगा। हालांकि इस प्रतिज्ञा के बाद भी ग्लोबल वार्मिंग के 2.5 ℃ के पार चले जाने की प्रबल संभावना है।

कुछ देशों में बढ़ते औद्योगिकीकरण के कारण ग्लोबल वार्मिग चरम पर है। ऐसे देशों में कारखानों के लिए विशेष गाइडलाइन्स का अनुपालन कराया जाना चाहिए।

पूरे विश्व में लगातार इस संबंध में शोध कार्य जारी हैं। 

इलेक्ट्रिक वाहन, सौर एवं पवन ऊर्जा इत्यादि का प्रयोग भी इन प्रयासों में सम्मिलित हैं।

व्यक्तिगत स्तर पर प्रत्येक मनुष्य कुछ प्रयास कर ग्लोबल वार्मिंग को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ऐसे कुछ उपाय निम्न हैं –

◆ यातायात के साझा वाहनों जैसे बस, ट्रेन इत्यादि का अधिक प्रयोग करके

◆ पेड़-पौधे लगाकर

◆ बिजली का अनावश्यक प्रयोग न करके

◆ भोजन की बर्बादी रोककर

◆ वस्तुओं का पुनः प्रयोग करके

◆ इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक प्रयोग करके

◆ जीवाश्म ईंधन के प्रयोग में कमी करके

◆ ग्लोबल वार्मिंग के विषय में जागरूकता फैला कर

उपसंहार – 

इन सभी तथ्यों का अध्ययन करने के बाद हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव को कम करने के लिए हम प्राकृतिक कारणों को तो नहीं रोक सकते परंतु मानव निर्मित कारणों पर अंकुश अवश्य लगा सकते हैं और ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव को कम कर सकते हैं। 

हम पेड़ लगा सकते हैं, सौर ऊर्जा व पवन ऊर्जा जैसे वैकल्पिक ऊर्जा माध्यमों का अधिक प्रयोग कर सकते हैं जिससे कि ग्रीनहाउस गैसों के प्रभाव को कम किया जा सके।

नागरिकों में जागरूकता फैलाने के लिए सरकारों को समय-समय पर इस संबंध में सम्मेलन एवं गोष्ठियों का आयोजन करते रहना चाहिए जिससे समाज की आने वाली पीढ़ियां भी इस संबंध में जागरूक एवं प्रयासरत रहें।

👉 यदि आपको यह लिखा हुआ निबंध 2 (1400+ शब्द) ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध हिंदी में – Global Warming Essay in Hindi पसंद आया हो, तो इस निबंध को आप अपने दोस्तों के साथ साझा करके उनकी मदद कर सकते हैं

👉 आप नीचे दिये गए सामाजिक मुद्दे और सामाजिक जागरूकता पर निबंध पढ़ सकते है तथा आप अपना निबंध साझा कर सकते हैं |

सामाजिक मुद्दे और सामाजिक जागरूकता पर निबंध
नयी शिक्षा नीति पर निबंधशिक्षित बेरोजगारी पर निबंध
जीना मुश्किल करती महँगाईपुरानी पीढ़ी और नयी पीढ़ी में अंतर
मानव अधिकार पर निबंधभारत में आतंकवाद की समस्या पर निबंध
भ्रष्टाचार पर निबंधजीवन में शिक्षा का महत्व पर निबंध
ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध (Global Warming Essay in Hindi)

विनम्र अनुरोध:

इस तरह “ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध (Global Warming Essay in Hindi)” यहीं पूरा होता है। हमने अपना सर्वश्रेष्ठ देते हुए पूरी कोशिश की है कि इस हिंदी निबंध में किसी भी प्रकार की त्रुटि ना हो। फिर भी यदि आप को इस निबंध में कोई गलती दिखती है तो आप अपना बहुमूल्य सुझाव ईमेल के द्वारा दे सकते है। ताकि हम आपको निरन्तर बिना किसी त्रुटि के लेख प्रस्तुत कर सकें।

यदि आपके मन में इस निबंध “ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध (Global Warming Essay in Hindi)“ को लेकर कोई सुझाव है या आप चाहते हैं कि इसमें कुछ और जोड़ा जाना चाहिए, तो इसके लिए आप नीचे Comment section में आप अपने सुझाव लिख सकते हैं आपकी इन्हीं सुझाव / विचारों से हमें कुछ सीखने और कुछ सुधारने का मौका मिलेगा |

यदि आपको यह लेख “ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध (Global Warming Essay in Hindi)” अच्छा लगा हो इससे आपको कुछ सीखने को मिला हो तो आप अपनी प्रसन्नता और उत्सुकता को दर्शाने के लिए कृपया इस पोस्ट को निचे दिए गए Social Networks लिंक का उपयोग करते हुए शेयर (Facebook, Twitter, Instagram, LinkedIn, Whatsapp, Telegram इत्यादि) कर सकते है | भविष्य में इसी प्रकार आपको अच्छी गुणवत्ता के, सरल और सुपाठ्य हिंदी निबंध प्रदान करते रहेंगे।

अपने दोस्तों को share करे:

Leave a Comment