📢 भारतीय स्वतंत्रता के 75 साल – Essay on 75 years of Indian Independence in Hindi
🔥 Join eWritingCafe Telegram for latest Essay topics
🔥 An Essay on Holi Festival in English

Essay on Train Journey in Hindi (मेरी पहली रेल यात्रा पर निबंध)

👀 “मेरी पहली रेल यात्रा पर निबंध” पर लिखा हुआ यह निबंध (Essay on Train Journey in Hindi ) आप को अपने स्कूल या फिर कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए निबंध लिखने में सहायता कर सकता है। आपको हमारे इस वेबसाइट पर और भी कही विषयों पर हिंदी में निबंध मिलेंगे (👉 निबंध सूचकांक), जिन्हे आप पढ़ सकते है, तथा आप उन सब विषयों पर अपना निबंध लिख कर साझा कर सकते हैं

Essay on Train Journey in Hindi
मेरी पहली रेल यात्रा पर निबंध


🚂 Essay on Train Journey in Hindi (मेरी पहली रेल यात्रा पर निबंध) पर यह निबंध class 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए और अन्य विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए लिखा गया है।

प्रस्तावना

जीवन में यात्राओं का महत्व बहुत होता है। एक इंसान अपने जीवन में कई प्रकार की यात्राएं करता है। आजकल यात्रा के भी कई आसान साधन उपलब्ध हो चुके हैं। आज एक सामान्य व्यक्ति भी अपने एक बाईक से या कार से दूर-दूर तक की यात्राएं कर सकता है। यात्राएं बेहद रोमांचकारी भी होती हैं। इसके विपरीत यात्राएं बहुत से लोगों में थकान, तनाव आदि भी पैदा कर देती हैं। बहरहाल, यहाँ मैं अपनी पहली यात्रा जो मैंने रेल से अपने माता-पिता और छोटी बहन के साथ की थी, वह साझा करने जा रहा हूँ। उस समय मेरी उम्र लगभग ग्यारह वर्ष की रही होगी। मेरे साथ मेरी छोटी बहन भी थी पर मुझे नहीं लगता कम आयु के कारण उसे इस यात्रा के बारे में स्मरण होगा। आइये मेरी उस रेलयात्रा के रोमांचक और अहम पहलुओं पर एक दृष्टि डालते हैं-

रेलवे स्टेशन की भीड़

अप्रैल माह की गर्मियों के दिन थे। कुछ दिनों पहले ही मेरी परीक्षायें समाप्त हुई थी जिसके कारण मेरी छुट्टियाँ चल रही थीं। हमें अचानक अपनी दिल्ली वाली बुआजी के घर शादी के सिलसिले में जाना था। उनके आग्रह पर पापा हमसे सामान पैक करने को कहा। मम्मी-पापा, मैं और मेरी छोटी बहन(4 वर्ष) ऑटो रिक्शे से रेलवे स्टेशन तक पहुँचे। दोपहर के डेढ़ बज रहे थे। हमारी ट्रेन 1:50 बजे की तय थी। हमारी टिकट पहले ही ऑनलाइन बुक हो चुकी थीं। जिसकी हमारे पास रसीद भी थीं। हम समय से थोड़ा जल्दी पहुँच गए थे। कुछ देर हम वहीं बनी हुए पत्थर की सीटों पर बैठे रहे। स्टेशन पर काफी संख्या में लोग मौजूद थे। गर्मी से सभी यात्री परेशान थे। प्लेटफॉर्म पर कई स्पीकर लगे हुए थे जिनमें से रेल के समय की जानकारी देने वाली महिला की आवाज आती थी। पापा मे बताया था कि इसे मशीन के इस्तेमाल से चलाया जाता है। मुझे अच्छा लगा। स्पीकर से हमारी रेल का नंबर भी बोला गया, वह अपने निर्धारित समय से कुछ समय देरी से आने वाली थी।

एक के बाद एक रेल का गुजरना

इस बीच कुछ ट्रेनें प्लेटफॉर्म पर आयीं और चली गईं। उनमें बैठे यात्रियों को मैं बड़े उत्साह के साथ दृष्टि लगाए देख रहा था। एक ट्रेन की गति कम थी क्योंकि वह प्लेटफॉर्म पर रुकने वाली थी। रुकते समय उसके पहियों के घर्षण से होने वाली आवाज मुझे आवाज लगी। मैं ट्रेन के पहियों को देखने के लिये आगे गया। मम्मी-पापा ने पूछा कि कहाँ जा रहे हो तो मैंने कहा कि इसके पहिये देखने थे। उन्होंने मेरी जिज्ञासा को समझकर कहा, “ठीक है पर दूर से ही देखना”। ट्रेन रुकी हुई थी। मैं उसके पहियों की बनावट देख रहा था। ये मजबूत लोहे के बने हुए थे। काफी सारी ऐसी चीजें उनसे जुड़ी हुई थीं जिनके बारे में मुझे नहीं पता था। मैंने सोचा कि इसमें बैठकर कितना अच्छा लगता होगा।

हमारी रेल का आना और सफर शुरु होना

आखिरकार मेरा इंतजार खत्म हुआ। थोड़े समय के बाद हमारी रेल प्लेटफॉर्म पर आयी। 2 बजकर पाँच मिनट हो रहे थे। यानि ट्रेन 15 मिनट ही लेट हुई थी। सैकड़ों की संख्या में सवारियाँ अपनी-अपनी सीट से उतर कर बाहर आ रही थीं। कुछ लोगों के पास बहुत ज्यादा सामान था तो वे कुली को बुलाने लगे। लोग उतरने और चढ़ने के लिये धक्कामुक्की कर रहे थे। इस बीच जब वहाँ से भीड़ खाली हुए तो हम लोग भी लखनऊ से नयी दिल्ली तक की यात्रा के लिये हम ट्रेन में बैठ गए। 

रेलगाड़ी में बैठने की कुछ स्मृतियाँ

हम अपना सामान लेकर रेल के एक डिब्बे के अन्दर में बैठने लगे। मैंने जाकर खिड़की वाली सीट पकड़ ली थी। खिड़की से बाहर लोगों की चहल पहल और आते जाते लोग दिख रहे हैं। मूँगफली और पानी की बोतल बेचने वाले भी कई लोग डिब्बों में मौजूद थे। पापा ने एक पानी की बोतल और दो पैकेट मूँगफली के लिये। मेरे उम्र के कई बच्चे भी अपने मम्मी-पापा के साथ ट्रेन में बैठे थे। कुछ देर रुकने के बाद जब ट्रेन चलने लगी तो मेरी उत्सुकता और भी बढ़ गई। पापा ने बताया था कि करीब तीन घंटों का सफर होगा। मेरी छोटी बहन भी मुझसे खिड़की वाली सीट से हटने की जिद करने लगी। उसके बहुत बार कहने के बाद मैंने बेमन से उसे सीट दे दी। अब भी कई अलग-अलग दृश्य मुझे खिड़की से दिखाई दे रहे थे। पेड़-पौधे और आसमान तेजी से आँखों के सामने से ओझल होता जा रहा था। इसके बाद हमारे धीरे-धीरे ट्रेन कुछ प्लेटफॉर्मों पर रुकने लगी। कई यात्री व फेरी वाले/विक्रेता चढ़ते व उतरते रहे। हमने तीन बार पानी की बोतलें ली और नमकीन  तथा बिस्कुट जैसा खाने का सामान भी लिया। पापा ने अपने पास बैठे एक बुजुर्ग से हमारे साथ कुछ खाने का आग्रह किया। उनके साथ कुछ बातें भी हुईं। बातों-बातों में उन्होंने बताया कि वे अकेले यात्रा कर रहे थे और हमारे समावेशी व्यवहार से बेहद प्रभावित हुए। हमारी ट्रेन करीब छह या सात बार विभिन्न प्लेटफॉर्मों पर रुकते हुए नई दिल्ली की तरफ पहुँची।

उपसंहार

यह मेरी पहली रेलयात्रा थी इसलिये मैंने लगभग हर उस चीज पर ध्यान दिया जो मुझे रोचक और अजीब लगी। इस यात्रा ने मुझमें दुनिया के प्रति एक वास्तविक नजरिया देने में काफी सहायता की। एक ओर जहाँ लोग एक-दूसरे की सहायता भी कर रहे थे तो दूसरी ओर कई लोग ऐसे थे जिन्हें आये दिन होने वाली चोरियों व ठगी से खतरा बना हुआ था। कुल मिलाकर यह यात्रा मेरे लिये एक चौतरफा सबक और अनुभव रही। इस यात्रा के बाद भी मैंने कई यात्राएं की जिन्हें ये अनुभव मेरे काफी काम आए। 

👉 यदि आपको यह लिखा हुआ Essay on Train Journey in Hindi (मेरी पहली रेल यात्रा पर निबंध) प्रारूप १ पसंद आया हो, तो इस निबंध को आप अपने दोस्तों के साथ साझा करके उनकी मदद कर सकते हैं |


👉 आप नीचे दिये गए छुट्टी पर निबंध पढ़ सकते है और आप अपना निबंध साझा कर सकते हैं |

छुट्टी पर निबंध
लॉकडाउन में मैंने क्या किया पर निबंधछुट्टी का दिन पर निबंध
गर्मी की छुट्टी पर निबंधछुट्टी पर निबंध
ग्रीष्म शिविर पर निबंधगर्मी की छुट्टी के लिए मेरी योजनाएँ पर निबंध
Essay on Train Journey in Hindi (मेरी पहली रेल यात्रा पर निबंध) पृष्ठ


विनम्र अनुरोध: 

आशा है आप इसे पढ़कर लाभान्वित हुए होंगे। आप से निवेदन है कि इस निबंध “Essay on Train Journey in Hindi (मेरी पहली रेल यात्रा पर निबंध) में आपको कोई भी त्रुटि दिखाई दे तो हमें ईमेल जरूर करे। हमें बेहद प्रसन्नता होगी तथा हम आपके सकारात्मक कदम की सराहना करेंगे। हम आपके लिये भविष्य में इसी प्रकार Essay on Train Journey in Hindi (मेरी पहली रेल यात्रा पर निबंध) की भाँति अन्य विषयों पर भी उच्च गुणवत्ता के सरल और सुपाठ्य निबंध प्रस्तुत करते रहेंगे।

यदि आपके मन में इस निबंध Essay on Train Journey in Hindi (मेरी पहली रेल यात्रा पर निबंध) को लेकर कोई सुझाव है या आप चाहते हैं कि इसमें कुछ और जोड़ा जाना चाहिए, तो इसके लिए आप नीचे Comment सेक्शन में आप अपने सुझाव लिख सकते हैं आपकी इन्हीं सुझाव / विचारों से हमें कुछ सीखने और कुछ सुधारने का मौका मिलेगा |


🔗 यदि आपको यह लेख Essay on Train Journey in Hindi (मेरी पहली रेल यात्रा पर निबंध) अच्छा लगा हो इससे आपको कुछ सीखने को मिला हो तो आप अपनी प्रसन्नता और उत्सुकता को दर्शाने के लिए कृपया इस पोस्ट को निचे दिए गए Social Networks लिंक का उपयोग करते हुए शेयर (Facebook, Twitter, Instagram, LinkedIn, Whatsapp, Telegram इत्यादि) कर सकते है | भविष्य में इसी प्रकार आपको अच्छी गुणवत्ता के, सरल और सुपाठ्य हिंदी निबंध प्रदान करते रहेंगे।

अपने दोस्तों को share करे:

Leave a Comment

X