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नारी शक्ति पर निबंध

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नारी शक्ति पर निबंध
Nari Shakti par Nibandh in Hindi


परिचय

प्रकृति में दो मौलिक और एक-दूसरे से भिन्न स्वभाव वाली शक्तियाँ होती हैं। एक, स्त्री और दूसरा, पुरुष। ये दोनों भले ही परस्पर विपरीत हों पर एक-दूसरे को पूर्ण भी करती हैं। सृष्टि का क्रम इन्हीं दोनों शक्तियों के संयोग से चलता है। इनका भेद केवल लिंग के आधार पर नहीं वरन, मन के स्वभाव के स्तर पर भी होता है। एक ओर जहाँ पुरुष का स्वभाव आक्रामक और विचारपूर्ण होना है, वहीं स्त्री का स्वभाव सहनशील और प्रेममय होना। पुराने समय से ही पुरुषों पर विस्तृत रूप से पुस्तकें रची गईं किन्तु नारी पर नहीं। आज का समाज वैज्ञानिक जिज्ञासा रखता है और इन नारी के ज्ञान पर ढकी सभी परतों को उतार देना चाहता है। आइये नारी और उसकी शक्ति को थोड़ा और समझते हैं।

नारी की स्वभाविक शक्तियाँ

नारी के स्वभाव में में सहनशीलता, प्रेम, साहस और धैर्य आदि कई गुण होते हैं। ये गुण कभी-कभी उसकी शक्ति के रूप में भी संसार को चौंका देते हैं। एक पुरुष में ये सभी गुण कम मात्रा में होते हैं, किन्तु जिन चुनिंदा पुरुषों में ये गुण सघन होते हैं उन्हें हम नारी प्रकृति प्रधान भी कहते हैं।

प्राचीन काल में नारी को एक उचित सम्मान दिया जाता था। उसे गृहस्थी के अतिरिक्त भी अन्य विभिन्न कलाओं जैसे युद्ध, संगीत, नृत्य आदि में भी प्रशिक्षित किया जाता था। हालांकि यह शिक्षा कुछ राजघरानों और बड़े औहदेदारों तक ही सीमित था। सामान्य घरों की स्त्रियाँ केवल गृहस्थी और अपने परिवार की देखभाल आदि में ही जीवन बिताती थीं।

आज हालात पहले से काफी बेहतर हैं, सभी नारियों के पास समान अवसर हैं ताकि वे अपने जीवन में कुछ सार्थक हासिल कर सकें। सरकार भी महिलाओं को उचित सुविधाएं प्रदान करती हैं। एक गृहिणी के रूप में सुचारु रूप से जीवन चलाने के लिये सभी साधन उपलब्ध कराए जाते हैं। वे स्वयं आगे बढ़कर कार्यभारों को संभालने का भी साहस रखती हैं।

नारी का समाज में महत्व

नर और नारी के उचित सामंजस्य से ही एक आदर्श समाज का निर्माण होता है। इनमें से किसी के बिना जीवन असंभव है। अपने परिवार के विस्तार के साथ-साथ एक नारी इसमें खुशहाली लाने के लिये भी प्रयत्नशील रहती है। घर के कामकाज सिखाने के अलावा भी यदि वह अच्छी शिक्षा ग्रहण करती है और अपने भविष्य को उज्जवल बनाती है, तो यह अन्य किशोर लड़कियों और युवतियों के लिये भी प्रेरणा का स्रोत हो सकता है। 

भगवान राम, जो एक आदर्श और मर्यादा पुरुष थे, उन्होंने अपने भाई लक्ष्मण से कहा था-

यत्रनार्यस्तेपूज्यन्तेरमन्तेतत्रदेवताः।

अर्थात जिस जगह पर नारियों का सम्मान होता है, वही देवता निवास करते हैं। किन्तु जहाँ उन्हें हेय दृष्टि से देखा और नीचा समझा जाता है वहाँ न सुख, न ही समृद्धि हो पाती है।

स्वयं के शारीरिक, मानसिक और आर्थिक स्तरों पर जब कोई नारी परिपक्व हो जाती है, तो वह दूसरों के लिये न केवल मिसाल बनती है बल्कि उनका भी मार्गदर्शन करती है। आज कई सारे NGOs, सरकारी योजनाओं और अन्य संस्थाओं की बागडोर नारियाँ ही संभाल रही हैं। और यकीनन वे लोगों की सेवा कुशलता से कर रही हैं। इससे उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता भी मिलती है और समाज के एक सम्माननीय पद भी।

आदर्श नारियाँ

दुनिया में कई स्त्रियों ने बहुत सारे लोगों को प्रेरित और पथ-प्रदर्शन किया है। मार्गरेट नोबल जिन्हें भगिनी निवेदिता के नाम से जानते हैं वे इसकी अप्रतिम उदाहरण हैं। मदर टेरेसा, फ्लोरेंस नाइटएंगल, हेलेन केलर और अन्य सैकड़ों नारियों ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन विश्व मंच पर किया है। 

भारत में भी महान और पूज्य स्त्रियाँ अनगिनत हैं। उन स्त्रियों के चरित्र और आत्मबल पूरी तरह शुद्ध और मजबूत थे। भारत की उन स्त्रियों में हम सती, सीता, द्रौपदी, अनुसूया, गार्गी, रानी लक्ष्मीबाई, रानी पद्मिनी आदि के साथ-साथ सहस्त्रों नाम गिन सकते हैं। ये नारियाँ न केवल नारियों के लिये ही बल्कि पुरुषों के लिये भी एक आदर्श साबित होती हैं।

ये नारियाँ बल, पराक्रम, शालीलता, विवक, करूणा, तप आदि गुणों से भी भरपूर थीं। इनकी कहानियों से हमारा छात्र वर्ग असीमित प्रेरणा पाता है और अपने जीवन को देश और धर्म के लिये उत्सर्ग करने को तैयार रहता है।

निष्कर्ष

नारी की आंतरिक शक्ति को समस्त विश्व ने पहचाना है। पुरुषों से अच्छा नेतृत्व आज नारियों कर कर रही हैं। वे विभिन्न राष्ट्रों के उच्च पदों पर आसीन होकर अन्य महिलाओं की छिपी शक्ति को भी जागृत करने की प्रेरणा दे रही हैं। हम सभी को समझना चाहिए कि जीवन के उचित विकास के लिये बिना किसी भेदभाव के एक लड़की को लड़के के समान ही अवसर और साधन मिलने चाहिए। यदि सभी नारियाँ सूरज की तरह अपने ही प्रकाश से चमक सकें तो यकीनन सारा विश्व भी इतिहास के सबसे सुनहरे युग में प्रवेश करेगा।

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