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Jal hi Jeevan Hai Essay in Hindi Language | जल ही जीवन है पर निबन्ध

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Jal hi Jeevan Hai Essay in Hindi Language | जल ही जीवन है पर निबन्ध
Jal hi Jeevan Hai Essay in Hindi Language | जल ही जीवन है पर निबन्ध

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Jal hi Jeevan Hai Essay in Hindi Language
जल ही जीवन है पर निबन्ध

🎃  “Jal hi Jeevan Hai Essay in Hindi Language | जल ही जीवन है पर निबन्ध” class 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए और अन्य विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए लिखा गया है।

प्रस्तावना :

प्रकृति ने प्राणी को कई अनमोल चीजें प्रदान की हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है जल एवं वायु। जल इस समस्त सृष्टि के लिए जीवन का वरदान है। इसके आभाव में मानव जीवन की कल्पना करना भी असम्भव है। प्राणी बिना अन्न के कुछ समय तक जीवित रह सकता है, लेकिन जल के बिना लंबे समय तक प्राणों की रक्षा नहीं की जा सकती है।

यही कारण है कि हमारे संपूर्ण जीवन में जल का महत्व बहुत अधिक है और कहा जाता है कि जल ही जीवन है (Jal hi Jeevan hai). हम इसी के बारे में और विस्तार से जल ही जीवन है पर निबन्ध या Jal hi Jeevan hai Essay के अंतर्गत और जानेंगे। 

जल का निर्माण :

जल का निर्माण हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के अणुओं से मिलकर होता है। इस का रासायनिक सूत्र H₂O है। हाइड्रोजन के एक ऑक्साइड के रूप में हाइड्रोजन या हाइड्रोजन यौगिक के जलने से अथवा ऑक्सीजन का ऑक्सीजन यौगिकों के साथ में प्रतिक्रिया करने से जल का निर्माण होता है। जल एकमात्र ऐसा पदार्थ है, जो ठोस, द्रव और गैस तीनों अवस्थाओं में मौजूद होता है।

जल की आवश्यकता :

Jal hi Jeevan hai hindi Essay – जीवन में लगभग हर क्षेत्र में और उम्र में जल की आवश्यकता और उपयोगिता है। धरातल पर जल को ज्यादातर कृषि, औद्योगिक और घरेलू कामों के लिए प्रयोग किया जाता है। घरेलू सेक्टर में भूजल का 9% जल इस्तेमाल होता है। घरेलू कार्यों जैसे कपड़े और बर्तन धोने, पीने और खाना बनाने एवं नहाने आदि के लिए हमें जल की आवश्यकता होती है।

चूंकि भारत एक कृषि प्रधान देश है, तो यहां कृषि में जल का सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाता है। जिन क्षेत्रों में अधिक वर्षा नहीं होती है, वहाँ सिंचाई के माध्यम से जल लाकर उपयोग किया जाता है। औद्योगिक क्षेत्रों में सतही जल का 2% और भूमिगत जल का 5% जल इस्तेमाल किया जाता है।

👉यदि आपके मन में इस निबंध “Jal hi Jeevan Hai Essay in Hindi Language | जल ही जीवन है पर निबन्ध“ को लेकर कोई सुझाव है या आप चाहते हैं कि इसमें कुछ और जोड़ा जाना चाहिए, तो इसके लिए आप नीचे Comment सेक्शन में आप अपने सुझाव लिख सकते हैं आपकी इन्हीं सुझाव / विचारों से हमें कुछ सीखने और कुछ सुधारने का मौका मिलेगा |

जल के स्रोत :

संपूर्ण पृथ्वी पर 75% जल है। इसका कुल 97% भाग समुद्री जल है जबकि बचे हुए 3% भाग जल को ही पीने में इस्तेमाल किया जाता है। जल के मुख्य दो स्रोत हैं जिसमें भूमिगत जल और सतही जल शामिल हैं। धरातल के सतह के नीचे स्थित जल भूमिगत जल और ऊपर स्थित जल सतही जल कहलाता है। भूमिगत जल मानसून वर्षा के समय पृथ्वी की सतह से रिसकर जाने वाला जल होता है। कुएं और झरने से मिलने वाला जल भूमिगत जल है। वहीं दूसरी तरफ नदियों, झीलों, तालाबों, समुद्रों एवं वर्षा का जल सतही जल के उदाहरण हैं।

जल का महत्व :

जल के बिना मनुष्य का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। इसलिए जल के महत्व को समझने की आवश्यकता है। मनुष्य के साथ-साथ पशु पक्षियों और सभी जीव जंतुओं को जल की आवश्यकता होती है। कई ऐसी फसलें भी हैं, जिन्हें उपजाने के लिए जल की बहुत अधिक मात्रा लगती है। गेहूँ , चावल, मक्का आदि ऐसी फसलें हैं, जिनका जल के बिना कोई अस्तित्व नहीं है।

ऑक्सीजन होने के बावजूद जल के बिना हमारा सांस लेना भी दूभर हो सकता है। जल के महत्व को देखते हुए प्रत्येक साल 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य विश्व के सभी देशों को जल का महत्व समझाना और इसे उपलब्ध कराना है। इस दिन आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों का जल संरक्षण की तरफ ध्यान केंद्रित करना भी है।

जल संरक्षण की आवश्यकता :

जल के सीमित भंडारण के कारण जल संरक्षण की आवश्यकता दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। कठोर चट्टानी सतहों के कारण जल भंडारण की सुविधाएं भी सीमित हो गई है। इसके अलावा भारतीय राज्यों में प्रत्येक वर्ष वर्षा की कमी के कारण भी जल संरक्षण की आवश्यकता बढ़ रही है। वनों की कटाई और वृक्षारोपण में कमी के कारण पर्याप्त मात्रा में जल का निर्माण नहीं हो पा रहा है जो कहीं न कहीं संकट का विषय बन गई है।

जल बचाव का तरीका :

आज हम सभी के पास जल बचाने के कई उपाय हैं। हर रोज उन उपाय को अपनाकर आसानी से जल की बचत की जा सकती है। जल बचाव करने के लिए हमें नहाते वक्त नल या सावर की जगह बाल्टी का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके अलावा बारिश से मिलने वाली पानी को जमा करके भविष्य में इसका इस्तेमाल करना चाहिए। बारिश के पानी को संरक्षित करने के लिए प्रत्येक घर में टंकी बनवाई जानी चाहिए।

इसे बरसात के बाद इस्तेमाल किए जाने की योजना बनानी चाहिए। यहां तक कि टॉयलेट में भी फ्लश की जगह बाल्टी के इस्तेमाल से पानी की बचत की जा सकती है।जल संरक्षण के लिए हमें भी अपनी तरफ से जल बचाव के उपाय अपनाने चाहिए। हमें अपने घर पर जरूरत के मुताबिक पानी का कम से कम इस्तेमाल करना चाहिए। रसोईघर में इस्तेमाल होने वाले सब्जियों और कपड़ों के धोए हुए पानी को पेड़ पौधों में डालना चाहिए।

पानी की बचत के लिए वृक्षों की कटाई रोक कर वृक्षारोपण को बढ़ावा देना चाहिए। इसके अतिरिक्त अधिक से अधिक तालाबों के निर्माण एवं उनकी स्वच्छता पर ध्यान देना चाहिए ताकि जल को संरक्षित किया जा सके।

जल बचाव के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम :

वर्तमान समय में भूमिगत जल के साथ-साथ धरातल का भी जल प्रदूषित हो रहा है। जल प्रदूषण के फलस्वरुप कई नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहे हैं। यदि जल प्रदूषण को दूर करने के लिए कोई कठोर कदम नहीं उठाए गए तो यह गंभीर संकट का कारण बन सकता है। इसी कारण सरकार कई तरह के अभियान चलाकर इसे बचाने में अपना सहयोग दे रही है।

सरकार ने इसके लिए राष्ट्रीय जलभृत मानचित्रण और प्रबंधन कार्यक्रम, जल क्रांति अभियान और राष्ट्रीय जल मिशन अभियान चलाए हैं। इसके अलावा जल जीवन मिशन, अटल भूजल योजना और जल शक्ति अभियान भी जल संरक्षण के लिए शुरू किए गए कार्यक्रम हैं। इन अभियानों का मुख्य उद्देश्य उपलब्ध भूजल संसाधनों की मात्रा निर्धारित करना, भूजल संचयन में सुधार करना, जल संसाधनों के विकास और प्रबंधन आदि से संबंधित योजनाएं बनाना है।

उपसंहार :

जल हमारे लिए बहुमूल्य धरोहरों में से एक है। इस धरती पर जल की मात्रा सीमित है। समय के साथ- साथ और बढ़ते प्रदूषण के कारण इसकी मात्रा में कमी हो रही है। इसके गंभीर परिणामों से बचने के लिए हमें जल संरक्षण के बारे में सोचना चाहिए। जल जीवन के समान ही मूल्यवान है यदि आज हमने इसका महत्व न समझा और इसे यूँ ही बर्बाद होने दिया गया तो आने वाले समय में जीवन के लिये बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।

हमारे आने वाली पीढ़ियाँ जल के आभाव में जीवन यापन नहीं कर सकेंगी। इसलिए जल को ही जीवन मान कर इसे सहेजने की आवश्यकता है। उम्मीद है की Jal hi Jeevan hai Essay में आपको जल ही जीवन है का महत्व भी समझ में आ गया होगा। 

👉 यदि आपको यह लिखा हुआ Jal hi Jeevan Hai Essay in Hindi Language | जल ही जीवन है पर निबन्ध पसंद आया हो, तो इस निबंध को आप अपने दोस्तों के साथ साझा करके उनकी मदद कर सकते हैं



जल ही जीवन है पर निबंध
Jal hi Jeevan hai Essay Hindi


‘जल ही जीवन है’ यह कथन बिल्कुल सत्य है। क्योंकि पानी के बिना इस धरती पर जीवन की कल्पना करना भी  मुश्किल है। जल एक ऐसी कीमती चीज़ है, जिसके बिना इंसान का कोई अस्तित्व ही नहीं। जल हमारे लिए ईश्वर का दिया हुआ वरदान है। यह न केवल पीने के काम आता है, बल्कि इससे हम नहाते, कपड़े धोते हैं, खाना पकाते हैं और साफ़ सफ़ाई भी करते हैं। पानी न केवल मनुष्य के लिए ज़रूरी है, बल्कि जीव-जंतुओं और पंछियों के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

पानी का हमारे जीवन में बहुत ज़्यादा महत्व है, इसीलिए इसे बर्बाद होने से बचाना भी हमारा कर्तव्य है। जिस तरह से आज के समय में जल प्रदूषण बढ़ा है, वह बहुत ही दुखद है। यदि आज हमने धरती के पानी की बचत नहीं की और उसकी बिना वजह बर्बादी को नहीं रोका, तो आने वाले समय में धरती पर पानी का नामों निशान नहीं बचेगा। और हमारी आने वाली पीढ़ी बिना पानी के धरती पर जीवित नहीं रह सकेगी।

जल ही जीवन है पर निबंध (Jal hi Jeevan hai Essay Hindi) –

💦 जल ही जीवन है पर निबंध (Jal hi Jeevan hai Essay Hindi) पर यह निबंध बच्चो (kids) और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है।

प्रस्तावना (Introduction) –

पृथ्वी का 71 प्रतिशत भाग पानी से ढका हुआ है, जिसमें से केवल तीन प्रतिशत पानी ही पीने योग्य है। इसलिए अगर हम चाहते हैं कि भविष्य में हमें पानी की कमी की गंभीर समस्या से न जूझना पड़े तो हम सबको मिलकर पानी की बचत और उसकी बर्बादी रोकनी होगी। जब लोगों के पास पानी बहुत होता है तो उन्हें उसकी कदर नहीं होती, लेकिन जब उनके पास पानी की कमी हो जाती है तब उन्हें पता चलता है कि पानी कितना कीमती है। हम पर ऐसी स्थिति न आ पड़े इसलिए हमें पहले से ही जल को दूषित होने से बचाना होगा।

जल का महत्व (Importance of Water) –

जल जैसे मनुष्य के लिए महत्वपूर्ण है, वैसे ही यह जीव-जंतुओं, पेड़-पौधों और पृथ्वी के अन्य प्राणियों के लिए भी ज़रूरी है। हमारे शरीर का आधा वजन ही पानी से बना हुआ है। बिना जल के पृथ्वी पर जीवन ही असंभव है। क्योंकि जल के बिना मनुष्य तड़पने लगता है और दम घुटने से उसकी मौत हो जाती है। 

जल के बिना पंछियों और अन्य प्राणियों का भी यही हाल होता है। कुछ फसलें ऐसी होती हैं, जो पानी के बिना पैदा ही नहीं होती हैं। जैसे – गेहूं, चांवल, मक्का आदि। पानी के बिना पेड़-पौधे मुरझा जाते हैं और ऑक्सीजन की कमी से मृत्यु हो जाती है।

जल का निर्माण कैसे होता है (How is Water Formed) –

जल एक ऐसा पदार्थ है, जो दो हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन के अणुओं से मिलकर बनता है। इसलिए जल का रासायनिक सूत्र H2O है। यदि आसान शब्दों में कहें तो हाइड्रोजन की एक ऑक्साइड के रूप में जब हाइड्रोजन या हाइड्रोजन-यौगिक जलते हैं या ऑक्सीजन या ऑक्सीजन-यौगिकों के साथ में प्रतिक्रिया करते हैं, तब जाकर जल का निर्माण होता है। जल एक ऐसा पदार्थ है, जिसकी तीन अवस्थाएं होती हैं –

(1) ठोस (Solid)

(2) द्रव्य (Liquid)

(3) गैस (Gas)

जल प्रदूषण से जल में कमी (Water Loss Due to Water Pollution) –

पृथ्वी पर जल की कमी का एक मुख्य कारण जो है, वह जल प्रदूषण है। लोग नदी, तालाबों आदि में नहाते हैं, कपड़े धोते हैं, जानवरों को स्नान कराते हैं, जिससे पानी दूषित हो जाता है और पीने योग्य नहीं बचता।

इसके अलावा लोग प्लास्टिक का इस्तेमाल करके भी जल को प्रदूषित करते हैं। प्लास्टिक जल प्रदूषण का बहुत बड़ा कारण है। प्लास्टिक एक ऐसी चीज़ है, जो नष्ट नहीं होती और लोग इसे जब तालाबों और नदियों में फेंकते हैं तो धीरे धीरे वो वहां इकट्ठा होती है और जल प्रदूषण का कारण बनती है।

इसके अलावा फैक्ट्रियों से निकलने वाले केमिकल भी जल प्रदूषण का बहुत बड़ा कारण है। फैक्ट्रियों से निकलने वाला केमिकल या गंदा पानी जब नदियों और तालाबों में जाकर मिलता है तो वो पानी पीने लायक नहीं बचता और इस तरह लोगों को पानी की कमी की समस्या का सामना करना पड़ता है।

जल संरक्षण के उपाय क्या हैं (Water Conservation Measures in Hindi) –

जिस तरह पानी की बर्बादी के कई तरीके हैं, उसी तरह पानी बचाने यानी जल संरक्षण के उपाय भी कई हैं। पानी बचाने के लिए आपको केवल नीचे बताई गई छोटी छोटी चीजों पर ध्यान देना है –

• ब्रश करते समय, दाढ़ी बनाते समय या सिंक में बर्तन धोते समय आप नल तभी खोलें जब आपको पानी की ज़रूरत हो। बिना वजह पाइप खोलने से केवल पानी की बर्बादी होगी।

• नहाते वक्त आप शॉवर के बाजए यदि बाल्टी और मग का इस्तेमाल करते हैं तो पानी की काफी हद तक बचत हो सकती है। 

• गाड़ी धोते वक्त भी आपको पाइप का इस्तेमाल करने की बजाए मग और बाल्टी का इस्तेमाल करके गाड़ी को धोना चाहिए।

• यदि कहीं पाइप या नल लीक कर रहा हो तो उसे फौरन बदलवाएं, क्योंकि इससे काफी पानी बिना वजह बह जाता है।

• वाशिंग मशीन में थोड़े थोड़े कपड़े धोने की बजाए, एक साथ सारे कपड़े धोने की कोशिश करें।

• पेड़ों में पाइप से पानी देने की बजाए, वॉटर टैंक से पानी देने पर पानी की बचत होती है।

• नदियों और तालाबों में नहाने और कपड़े आदि धोने पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।

• कारखानों या फैक्ट्रियों से निकलने वाले केमिकल या गंदे पानी नदियों को गंदा करते हैं। इनके ऊपर प्रतिबंध लगाना चाहिए।

• वर्षा के पानी को संचय करने का प्रयत्न करना चाहिए।

• ज़्यादा से ज़्यादा पेड़ लगाने चाहिए। क्योंकि जहां पेड़ होते हैं, उस क्षेत्र में अधिक वर्षा होती है। और वर्षा से नदियों में जल अच्छी तरह जाकर भर जाता है। इसके अलावा पेड़ पौधे स्वच्छ पर्यावरण के लिए भी बहुत अच्छे होते हैं।

• यदि आपके पास पालतू जानवर हैं तो आप उन्हें अपने बगीचे में नहला सकते हैं। इससे आपका जानवर नहा भी लेगा और बगीचे को भी पानी मिल जाएगा।

• अगर किसी सार्वजनिक स्थलों की नल खराब हैं तो उन्हें जल्द से जल्द ठीक कराने का प्रयत्न करके भी अधिक मात्रा में जल की बचत की जा सकती है।

निष्कर्ष (Conclusion) – 

हमारी पृथ्वी पर पानी एक सीमित मात्रा में ही उपलब्ध है। यदि हमने इसे बचाने और इसका दुरुपयोग बंद नहीं किया तो हमारी आने वाली पीढ़ी को पानी की एक एक बूंद के लिए तरसना पड़ सकता है। इसलिए सरकार और हम सबको पानी को संरक्षित करने और उसे बर्बाद होने से बचाने के लिए अलग अलग तरह के प्रयास करने चाहिए। तभी जाकर हम धरती पर पानी की कमी को रोक सकते हैं। क्योंकि जल ही जीवन है। 

जल के बिना कुछ भी मुमकिन नहीं। यह धरती नहीं, यह हरियाली नहीं, न मनुष्य, न जानवर, न पंछी कोई भी नहीं। हम सबका यह कर्तव्य है कि हम सब मिलकर अपने आने वाले भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए पानी की कीमत को समझें और उसको सुरक्षित करें।

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विनम्र अनुरोध (Humble request)

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