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[Essay On 75th Independence Day Of India] [Azadi Ka Amrit Mahotsav Essay in English]

Essay on Raksha Bandhan in Hindi (रक्षाबंधन पर निबंध)

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Essay on Raksha Bandhan in Hindi
रक्षाबंधन पर निबंध

🌈 Essay on Raksha Bandhan in Hindi (रक्षाबंधन पर निबंध)  पर यह निबंध class 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए और अन्य विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए लिखा गया है।

प्रस्तावना

रक्षाबंधन हमारे देश के प्रमुख त्यौहारों में से एक है। यह भारत के साथ-साथ विदेशों में रह रहे भारतीयों द्वारा भी मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर से रक्षा सूत्र या राखी बाँधती हैं। तथा भाई अपनी बहनों की हर विपत्ति से रक्षा करने का वचन देते हैं। रक्षाबंधन का इतिहास सदियों पुराना है। आइये इस निबंध में रक्षाबंधन के इतिहास आदि के संबंध में कुछ मुख्य बातें जानते हैं-

वर्ष 2022 में रक्षाबंधन की तिथि व समय

रक्षाबंधन को श्रावण मास की पूर्णिमा मनाया जाता है। वर्ष ‌2022 में यह तिथि 12 अगस्त को है। हालांकि संयोगिक परिस्थितियों के अनुसार 11 तारीख को भी रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा सकता है। 

रक्षा बंधन का इतिहासिक महत्व

रक्षाबंधन से संबंधित कई कहानियाँ हमें हमारे प्राचीन इतिहास में मिलती है। प्रचलित है कि एक बार असुरों ने देवताओं को युद्ध में हराकार उनकी समस्त धन संपत्तियों पर अधिकार कर लिया। इन्द्र अपनी तथा अपने राज्य की रक्षा के लिये देवताओं के गुरु बृहस्पति के पास पहुंचे और सहायता मांगने लगे। गुरु बृहस्पति ने यज्ञ के द्वारा सुरपति इंद्र की रक्षा करने और समृद्धि वापस दिलाने का उपकर्म किया।

इस यज्ञ से एक सूत्र यानि पवित्र धागा प्राप्त हुआ जिसे इंद्राणी ने देवराज इन्द्र की कलाई पर बाँधा। इसके उपरान्त उन्होंने युद्ध लड़ा और असुरों को पराजित कर दिया। इस प्रकार देवराज ने अपना राजपद पुन: पा लिया। उस समय से ही रक्षा बंधन का पर्व मनाया जाने लगा

एक अन्य कथा कहती है कि द्वापर युग भगवान श्री कृष्ण की अंगुली किसी कारणवश कट गई । जब द्रौपदी ने उनकी अंगुली से रक्त का प्रवाह देखा तो उसने तत्काल अपनी साड़ी से एक चीर फाड़कर श्रीकृष्ण की अंगुली पर बांध दिया। इसके कुछ समय उपरांत भगवान श्री कृष्ण ने भी द्रोपदी की साड़ी को कई गुना बढ़ाकर उसकी लाज बचाई।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में रक्षाबंधन की महत्ता

यूं तो त्योहारों का महत्व हम सब जानते ही हैं परंतु आज के इस तकनीकी और तेजी से बदलते युग में का त्योहार अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं। आज कल यह साफ है की हम अपने त्योहारों को उतने

उत्साह और उमंग से नहीं मनाते जितना कि पहले के समय में होता था।

त्यौहार हमारे रिश्ते और संबंधों को जोड़ने वाले पुल की भांति होते हैं। एक भाई और बहन बचपन से ही साथ में खेलते खाते और परस्पर विभिन्न बातें साझा करते हैं। भाई बहन का संबंध एक अत्यंत पवित्र और बिना किसी स्वार्थ का संबंध होता है। रक्षाबंधन भाई बहनों की उसी पवित्र संबंध को और अधिक सुदृढ़ और गहन बनाता है। रक्षाबंधन में बांधा जाने वाला धागा अथवा राखी एक पवित्र प्रतीक है जो भाई-बहन के स्नेह और प्रेम को जोड़े रखता है।

रक्षाबंधन से संबंधित एक पवित्र मंत्र

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:। 

तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।

अर्थात, दानव और राक्षस के राजा बलि जिस रक्षा सूत्र से बांधे गए थे, उसी रक्षा सूत्र को तुम्हें बांधता हूं। हे रक्षा! तुम अचल रहना, अचल रहना।

इस ‌श्लोक का सार है कि जब बहन अपने भाई को राखी बांधती है तो वह राखी या रक्षा सूत्र से अचल रहने को कहती है जिससे उसका भाई सदा सुखी व सुरक्षित रहे। अपनी बहन के इसी प्रेम के बदले में भाई बहन की रक्षा करने का वचन देते हैं।

रक्षाबंधन के लिए भारत सरकार के कुछ कदम

यह अक्सर देखा जाता है की रक्षाबंधन जैसे त्योहारों पर सरकार महिलाएं और बहनों की सुविधा के लिए कई तरह की योजनाएं आदि चलाती हैं। जो एक बेहद सकारात्मक व अच्छा पहलू है। जो बहनें अपने भाइयों को राखियां कहीं दूर से डाक द्वारा भेजती हैं उन्हें भी आकर्षक छूट व सुविधाएं आदि दी जाती हैं। तुलनात्मक रूप से कम पैसे लिए जाते हैं।

इसके अलावा परिवहन मंत्रालय व राज्यों के मंत्रियों द्वारा कई तरह की योजनाएं शुरू की जाती हैं ताकि महिलाएं आसानी से एक शहर से दूसरे शहर तक आवागमन कर सकें। उदाहरण के लिए सरकारी परिवहन माध्यमों बस वो रेल आदि में रक्षाबंधन के दिन महिलाओं से किसी भी प्रकार की किराया नहीं लिया जाता। इससे सरकार को भी कुछ विशेष हानि नहीं होती है।

Essay on Raksha Bandhan in Hindi 

आर्टिकल का नाम रक्षाबंधन पर निबंध
साल2022
त्यौहार का नामरक्षाबंधन
अन्य नामराखी का पर्व
कब मनाया जाता हैश्रावण पूर्णिमा
इस वर्ष रक्षाबंधन11 अगस्त 2022

निष्कर्ष

निष्कर्ष के तौर पर केवल इतना ही कहना चाहूंगा कि रक्षाबंधन जैसे त्योहार संसार में कुछ ही हैं। ऐसे त्योहार हमारे रिश्तों की पवित्रता और दृढ़ता को कायम रखने में अहम योगदान देते हैं। ऐसे त्योहार न केवल हमें मानसिक रूप से प्रसन्न रहने में हमें सहायता करते हैं बल्कि हमें बाहरी दुनिया से भी जोड़ते हैं। 

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